मैं बनी चपड़ासी के बच्चे की मां-3

Naukar Naukrani

पिछला भाग पढ़े:- मैं बनी चपड़ासी के बच्चे की मां-2

आप सब को पता ही है मेरे पति बिस्तर पर ज्यादा अच्छे नहीं हैं, पर मुझे मेरे बैंक में काम करने वाले चपड़ासी राजन ने चुदाई का मजा भी दिया, और अपने बच्चे की मां भी बना दिया। अब आगे की कहानी।

मेरा बेटा 7 महीने का हो गया था। मेरे पति तो उसको दिल से प्यार करते थे पर मैं तरसती रह जाती थी उस प्यार के लिए जो मुझे राजन से मिला था। मुझे जब भी राजन की याद आती थी, तब मैं राजन के बारे मे सोच कर चूत मे ऊंगली डाल लेती और चूत को शांत कर लेती।

एक दिन मेरे पति बैंक की एक ट्रेनिंग के लिए बाहर चले गए 2-3 दिन के लिए। मैं पति के जाने से खुश हो गई। फिर अगली रात को मैं पति के फोन आने के बाद अपने बेटे को लेकर राजन के घर चली गई। मैंने घर का दरवाज़ा खटखटाया। राजन मुझे देख कर बहुत खुश हो गया।

फिर मैं अंदर आ गई। राजन ने दरवाजा बंद कर दिया। मैंने राजन को अपने गले से लगा लिया, और राजन के मुंह को चूमने लगी। राजन भी मुझे चूमने लगा। फिर कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए। तब मैंने राजन की गोद में बेटे को दिया और कहा-

मैं: अपने बेटे से नहीं मिलोगे?

राजन बेटे को प्यार करने लगा। मैं राजन की रसोई घर में गई, और बेटे के लिए दूध और हम दोनों के लिए कुछ खाना बना कर ले आई। मैं बेटे को दूध पिलाने लगी, तो राजन बोला-

राजन: काजल आज तो मैं भी अपने बेटे के साथ दूध ही पियूंगा।

यह बोल कर राजन ने मेरी कमीज को ऊपर कर दिया और मेरी ब्रा को खोल कर मेरे एक बूब्स को मुंह मे भर कर पीने लगा। राजन भी बिल्कुल अपने बेटे के जैसे मेरा बूब्स मुंह में लेकर दूध पीने लगा। फिर मैंने अपने दूसरे बूब्स को अपने बेटे के मुंह से लगा दिया। दोनों मिल कर मेरा दूध पीने लगे।

कुछ देर बाद बेटा दूध पी कर सो गया। मैंने उसको उठा कर बैड की एक साइड सुला दिया, और राजन को अपने ऊपर खींच कर मैं भी बैड पर लेट गई। राजन बहुत प्यार से मेरे निप्पल चूसता रहा। मेरा एक हाथ राजन की पेंट के ऊपर से उसके लंड को दबाने लगा।

कुछ देर बाद राजन मेरे बूब्स से हट गया और अपने कपड़े खोलने लगा। मैंने भी अपनी सलवार और पेंटी उतार दी। फिर राजन के लंड को देख कर लंड पर टूट पड़ी। मैं लंड को मुंह मे लेकर चूसने लगी। आज बहुत समय बाद मैं लंड को खुल कर चूस रही थी।

राजन अपने हाथ से मेरी चूत को सहला रहा था। फिर राजन ने मुझे लिटा दिया। मैं भी अपनी टांगो को फैला कर राजन के लंड का स्वागत करने लगी। राजन मेरी चूत पर लंड रगड़ने लगा। और फिर एक हल्का सा धक्का मारा जिससे लंड मेरी चूत मे जाने लगा। मेरी चीख निकल गई। राजन ने मेरे होंठो को अपने होंठो से बंद कर दिया।

मेरी चीख अंदर दब कर रह गई राजन ने आराम-आराम से लंड पूरा मेरी चूत में डाल दिया। फिर कुछ देर रुक कर लंड अन्दर-बाहर करने लगा। आज मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई मेरी कुंवारी चूत में रोड डाल रहा हो। राजन अब भी धीरे-धीरे लंड चूत के अंदर-बाहर कर था।

मेरा दर्द कम हुआ तो मैं गांड उठा कर लंड को अंदर लेने लगी, और राजन के गले में अपनी बाहों को डाल दिया। अब राजन ने लंड डालने की स्पीड बढ़ा दी। राजन कभी मेरे मुंह को चूमता, तो कभी मेरे बूब्स को पीने लगा, और राजन का लंड पूरे जोश से मेरी चुदाई करने में लगा था।

मैं भी मजे लेते हुए राजन को बोलने लगी: बहुत प्यासी है मेरी चूत कब से। आज चूत को चोद कर चूत की गर्मी निकाल दो।

राजन बिना कुछ बोले और तेजी से मेरी चूत को चोदने लगा। मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। अब हमारी चुदाई की आवाज़ कमरे मे साफ सुनाई देने लगी।

राजन के हर धक्के का जवाब मैं गांड उठा कर दे रही थी। काफी देर बाद राजन के लंड ने पानी छोड़ दिया। मेरी चूत के अन्दर ही राजन मेरे उपर ही लेट गया। मैंने भी राजन को अपने उपर सोने दिया। फिर राजन मुझे बोला-

राजन: काजल तेरी चूत तो बहुत कस गई थी। अगर कुछ ओर दिन तुम चुदाई नहीं करवाती तो आज भी नई चूत की तरह बहुत खून खराबा होता।

मैं हंसने लगी। फिर राजन मेरे ऊपर से हट गया। मैं भी उठ गई, और राजन के लंड को चूसने लगी। फिर राजन और मैं 69 की स्तिथि में हो गए। हम दोनों एक-दूसरे के लंड और चूत चाटने लगे।

हम दोनों काफी देर बाद एक-दूसरे के मुंह में झड़ गए। मैंने राजन के लंड को चाट कर साफ कर दिया, और राजन ने मेरी चूत को। फिर हम दोनों ने वैसे ही नंगे होकर खाना खाया। राजन रसोई से तेल की बोतल ले आया। मैं समझ गई आज राजन फिर से मेरी गांड की चुदाई करेगा।

राजन मुझे बोला: काजल मेरे लंड पर तेल की मालिश कर अच्छे से।

मैं तेल लेकर मालिश करने लगी। मैंने राजन के लंड को तेल से अच्छी तरह चमका दिया। फिर राजन मेरे बूब्स पीने लगा। राजन के हाथ मेरी गांड को दबाने लगे।

फिर राजन बोल पड़ा: काजल घोड़ी बन जा। मुझे कब से तेरी गांड चोदने का मन था।

मैं घोड़ी बन गई। राजन मेरी गांड पर आ गया, और मेरी गांड के छेद को चाटने लगा। मुझे बहुत अजीब लग रहा था। फिर राजन मेरी गांड के छेद पर तेल लगाने लगा, और एक ऊंगली मेरी गांड के अंदर बाहर करने लगा। मुझे राजन की ऊंगली अंदर लेते हुए भी दर्द होने लगा।

फिर कुछ देर बाद राजन ने मेरी गांड के छेद पर लंड सेट कर दिया, और मुझे कमर से कस कर पकड़ लिया। अब राजन ने देर ना करते हुए लंड का एक जोर का झटका मारा। लंड मेरी गांड फाड़ता हुआ अंदर जाने लगा। मेरी चीख निकलने को हुई पर मैंने तकिये के अंदर अपना मुंह छुपा लिया।

राजन ने फिर एक बार एक और झटका मारा,‌ और लंड मेरी गांड के अंदर पूरा चला गया। मैं झटपटाने लगी। राजन मेरी कमर को मजबूती से पकड़े हुए रहा। जब मैं कुछ सही हुई तो राजन ने लंड अंदर-बाहर करना शुरु कर दिया। राजन के हर धक्के से मेरे दूध से भरे हुए बूब्स झूलने लगे।

राजन मेरी गांड चोदते हुए मेरी गांड के ऊपर थप्पड़ भी मार रहा था।

मैं राजन को आज कुछ भी करने से रोकना भी नहीं चाहती थी, तो मैंने राजन को कुछ नहीं बोला। राजन मेरी गांड फाड़ने में लगा रहा। मैं भी राजन का पूरा साथ दे रही थी।

मैं बीच-बीच में अपने एक हाथ से चूत को भी सहला रही थी। फिर राजन ने मुझे बालों से पकड़ कर चोदना जारी रखा। उसी बीच मेरा बेटा उठ गया और रोने लगा। मैंने राजन को रुकने के लिए बोला। राजन मेरी गांड में लंड डाले हुए रुक गया।

मैंने बहुत मुश्किल से अपना एक बूब्स अपने बेटे के मुंह में डाला और बेटा दूध पीने लगा। राजन से भी अब रुका नहीं जा रहा था, तो राजन आराम-आराम से लंड को गांड के अंदर-बाहर करने लगा। कुछ देर बाद बेटा फिरसे सो गया। राजन ने भी धक्के मारने शुरु कर दिये।

कुछ देर बाद राजन ने लंड गांड से बाहर निकाला, और चूत में भर दिया, और चुदाई जारी रखी। इस बार राजन ने मुझे बहुत देर तक चुदाई का मजा दिया। फिर मेरे कहने पर राजन ने लंड का पानी मेरे मुंह के अन्दर निकाल दिया।

उस रात राजन और मैंने रात भर खुल कर चुदाई का मजा लिया, और सुबह जल्दी ही मैं बेटे को लेकर घर आ गई। कैसी लगी मेरी कहानी ज़रूर बताना सब।

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