दोस्त की बड़ी बहन काजल को पटा कर उनकी चूत फाड़ी-4

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पिछला भाग पढ़े:- दोस्त की बड़ी बहन काजल को पटा कर उनकी चूत फाड़ी-3

फिर मैं दीदी से चिपक कर उनको उत्तेजित करने लगा, और उनकी चूचियों को मैं मसलने लगा, जिससे वो भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी। वो मना भी कर रही थी कि आज नहीं कल करेंगे। पर मैं हार ना मानते हुए उनकी चूचियों को मसल रहा था, और एक हाथ से उनकी पीठ को सहला रहा था। फिर पतली कमर से होते हुए गांड को सहलाने लगा, और धीरे से उनकी कैप्री को नीचे कर दिया।

वो मदहोशी की हालत में थी तो उन्हें पता नहीं चला कि मैंने उनकी कैप्री भी नीचे कर दी थी। फिर मैंने अपने लंड को उनकी गांड से सटा दिया, जिसकी वजह से मेरे लंड की गर्मी का एहसास काजल दीदी को होने लगा, और वो तुरन्त पलट गई, और मेरा लंड पकड़ ली और बोली, “कल करेंगे ना प्लीज”।

तो मैंने उन्हें बोला: मेरी जान, ऐसा मौका पता नहीं हमे कल मिले या नहीं। इसलिए आज जो है उसके मजे लेलो, कल का कल देखेंगे।

फिर तुरन्त मैंने कम्बल हटा दिया। तो काजल दीदी की गोरी-गोरी टांगो के ऊपर गोरी-गोरी मांसल जांघे और उनके ऊपर कद्दू जैसे बड़े-बड़े और गोरे चूतड़ों को देख कर मेरा लंड फनफना गया। मुझे स्टेशन की वो बात याद आ गई जो मैंने काजल दीदी को देखते ही सोचा था, ठीक उसी तरह दीदी की गोरी मांसल जांघे और गांड थी।

अब तो इंतजार था दीदी की चूचियों तथा गुलाबी और कुंवारी चूत देखने का। तभी मेरे 8 इंच लम्बे तथा 3 इंच मोटे काले लंड को देख उनकी आंखे फटी रह गयी। फिर वो मुझसे बोली-

दीदी: ये कैसे जाएगा मेरे अन्दर?

तो मैंने बोला: दीदी आप टेंशन ना लो, मैं हूं ना, सब जाएगा आराम से।

मैंने दीदी को खड़ा किया और उन्हें बाथरूम में ले गया, तांकि विडियो भी रिकार्ड होता रहे फ्यूचर के लिए, और रिकार्डिंग की बात काजल दीदी को पता भी नहीं थी। फिर मैं उन पर भूखे भेड़िए की तरह टूट पड़ा, और किस करने लगा। उनके जिस्म के हर एक अंग को मैं अपने हाथों से सहला रहा था।

फिर मैंने तुरन्त काजल दीदी का टाप निकाल दिया, तो ब्लैक ब्रा में कैद चूचियां आजाद होने को तड़प रही थी। पर मैंने पहले ब्रा के ऊपर से ही दीदी की चूचियों को चूमा, फिर उन्हें मसलने लगा, और फिर मैंने तुरन्त दीदी की कैप्री को निकाल दिया। अब दीदी ब्रा और कच्छी में थी।

फिर मैं दीदी को बोला: दीदी मैंने सच में जो बोला था वैसी ही आप हो। कयामत लग रही हो।

इतना कहते ही मैंने धीरे से काजल दीदी की ब्रा का हुक खोल दिया। अब काजल दीदी की पपीते के आकार की टाईट चूचियां लटकने लगी और झूमने लगी, जैसे कोई पंछी किसी पिंजरे से बाहर होकर झूमता है। मैंने देखा काजल दीदी की चूचियों पर कोई दाग ता धब्बा तक नहीं था। बस भूरे निप्पल उस पर सीधे सीना ताने खड़े थे। मैं इतनी मखमली रसभरी चूचियों को देख उस पथ टूट पड़ा, और उसे चूसने लगा। मैं जितना काजल दीदी की चूचियों को चूस रहा था, काजल दीदी की आहें उतनी ही तेजी से निकल रही थी। वो एक-दम गर्म हो गयी थी।

करीब बीस मिनट चूचियां चूसने के बाद मैंने काजल दीदी को बैठने का इशारा किया, और अपना लंड चूसने को बोला। वो मना करने लगी तो मैंने अपना लंड उनके मुंह में पेल दिया और उनके मुंह को चोदने लगा। उनके मुंह से गूं… गूं.. गूं… गूं… की आवाज़ निकल रही थी। अब मेरा लंड तैयार था तो मैंने काजल दीदी को 69 के पोजीशन में किया और उनकी कच्छी निकाल दी। अब उनकी गुलाबी कच्ची कमसिन कुंवारी चूत मेरे सामने थी, जिस पर उनकी हल्की झांटे थी।

फिर मैंने अपने जीभ से उनकी चूत को चोदना शुरू किया और मैं उनकी चूत की फांको के बीच के दाने को अपनी जीभ से चाट रहा था। मैं उसको दांत से हल्का पकड़ कर खींचता तो काजल दीदी की आह निकल जाती। अब काजल दीदी पूरी तरह से गर्म हो गयी थी, और उनकी चूत मेरे लंड को लेने के लिए तैयार थी। काजल दीदी बोलने लगी-

दीदी: सूरज अब ना तड़पाओ अब रहा नहीं जाता। आज मुझे चोद दो मेरे राजा, और अपनी बीवी बना लो।

मैंने भी अब काजल दीदी को बेड पर लिटाया, और कमर के नीचे तकिया रख दिया, तांकि चूत का मुंह एक-दम ऊपर रहे और चूत जब उठी रहेगी तो चोदने का मजा दोगुना हो जाएगा। तो मैंने ज्यादा देर ना करते हुए अपने लंड को काजल दीदी की कुंवारी चूत के द्वार पर रगड़ने लगा।

काजल दीदी बोली: कंडोम नहीं लगाओगे?

तो मैंने भी बोल दिया: जब हम तुम्हारे हैं सनम, तो काहे का कंडोम। चलो आज जी लेते हैं अपनी जिंदगी और एक-दूसरे को मजा देते हैं।

इतना कह कर मैंने अचानक से एक झटके में करीब 3 इंच लंड काजल दीदी की चूत में पेल दिया। काजल दीदी की चूत टाईट होने की वजह से मेरे सुपाड़े के ऊपर की चमड़ी भी पीछे हो गयी तो मुझे भी बहुत तेज दर्द हुआ। पर काजल दीदी रोने लगी तो मैंने उन्हें किस किया और उन्हें बोला-

मैं: रोना मत मेरी जान, अभी हम तुम्हें कराते हैं अपने गन्ने का रसपान।

और फिर मैंने अपना लंड हल्का सा बाहर निकाला और जोर का धक्का दिया। करीब 6 इंच लंड अन्दर चूत की दीवारों को चीरता फाड़ता अन्दर घुसता चला गया।

काजल दीदी के मुंह से निकला: उउउईईई मां… मर गई।

वो छटपटाने लगी और रोने लगी। मेरे सामने वो गिड़गिड़ाने लगी कि प्लीज मुझे छोड़ दो सूरज प्लीज छोड़ दो। पर मैं कहां मानने वाला था और फिर मैंने काजल दीदी के कंधे के पीछे से अपने दोनों हाथों का घेरा बना कर एक और जोर का धक्का मारा। तभी काजल दीदी बहुत तेज चिल्लाई, और वो आवाज़ इतनी तेजी थी कि बगल के फ्लैट वाले भी जान गए होंगे की किसी की चूत फटी थी आज।

काजल दीदी के आंखो से आंसुओं की धारा बह रही थी, और मैं उन्हें किस कर रहा था, और उनकी चूचियों को मसल रहा था ताकि उनका दर्द कम हो। उनके कराहने की आवाज़ से मुझे पता चल गया कि सील टूट गयी थी।

मैंने हल्का सा जब लंड बाहर निकाला तो मेरे लंड से काजल दीदी का खून टपक रहा था, और मैं तुरन्त फिर से लंड चूत में पेल दिया तांकि काजल दीदी ना देखें। काजल दीदी के मुंह से बस उह आह उह आह की आवाज़ निकल रही थी जो पूरे कमरे में गूंज रही थी। मैं कुछ देर रूक गया और जब काजल दीदी थोड़ा शान्त हुई तो फिर मैंने अपना लंड अन्दर-बाहर करना शुरू किया।

तभी काजल दीदी झड़ गयी और निढ़ाल होने लगी। पर मैं अभी नहीं झड़ा था, तो काजल दीदी को चोदे जा रहा था। उनके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी, और अब काजल दीदी को भी मजा आने लगा था, तो वो जोर-जोर से बोल रही थी-

दीदी: हां सूरज, हां सूरज, चोद दो मुझे, फाड़ दो मेरी चूत मेरे जानू, मेरे राजा, चोद डालो मुझे, और अपनी दासी बना लो।

मैं काजल दीदी के मुंह से ये सब सुन कर अपनी स्पीड बढ़ा दिया, और 5 मिनट बाद मैं झड़ने वाला था तो मेरे मुंह से आवाज निकली-

मैं: गया मैं तो गया काजल, मेरी जान लेलो मेरी जान, मेरा लंड अपनी चूत में।

फिर मैं काजल दीदी की चूत में ही झड़ गया, और काजल दीदी की चूत को गरम-गरम वीर्य से भर दिया। फिर मैंने मोबाईल निकाल कर दो तीन फोटो काजल दीदी के साथ लिया। वो अपना चेहरा छुपा रही थी, पर मैंने उनसे विनती किया और बोला-

मैं: चिंता ना करो दीदी, किसी को दिखाऊंगा नहीं।

तो वो फोटो खिंचवाई और मैंने उस फोटो को फोन में छुपा लिया। फिर हम दोनों थक कर सो गए। सुबह कब हुई पता ही नहीं चला, और जब शिवम आया तो मेन गेट बन्द ना होने की वजह से वो अन्दर आ गया। वो जब मेरे कमरे में आया तो मुझे और काजल दीदी को उस हालत में देख कर बहुत तेज गुस्साया।

क्योंकि उस वक्त काजल दीदी मेरी बाहों में थी, और हम दोनों नंगे ही सोए थे। कोई होश नहीं था। वो आकर जब हम दोनों को धक्के मार कर जगाया। मैं उठा तो काजल दीदी की चूत में मेरा लंड था और दोनों पैरों को क्रास के आकार में करके सोए थे। तो मैंने काजल दीदी को जगाया।

शिवम मुझे एक थप्पड़ मारा तो मैंने कुछ नहीं बोला, पर जब काजल दीदी को मारने गया तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।

फिर मैं बोला: हाथ मत लगाना उसे। वो अब मेरी अमानत है, और अब उस पर मेरा हक है।

तो शिवम बोला: रूको अभी पापा को बताता हूं।

तो मैंने भी बोल दिया: चल मैं भी तेरे और माया के बारे में बता दूंगा।

तो वो शान्त हो गया। फिर मैंने उसे समझाया कि भाई देख अब जो होना था वो तो हो गया, और ये कैसे हुआ मुझे भी नहीं पता भाई। तो भलाई इसी में है कि ये बात हम तीनों तक ही रहे, नहीं तो बहुत बदनामी होगी।

फिर शिवम के सामने ही मैंने काजल दीदी को किस किया और उनसे बोला: आप मत डरो, शिवम किसी को नहीं बताएगा। दीदी आज किसी तरह से माया को मना कर आज शिवम की चुदाई फिक्स करवा दो। इतना सुनते ही शिवम खुश हो गया, और फिर मेरे गले लग गया।

फिर वो पूछा: क्यूं भाई, तुम्हे काजल दीदी ही मिली थी?

तो मैंने बोला: भाई काजल दीदी कड़क माल हैं, तो उन्हें कैसे छोड़ देता? आखिर कोई तो उनको बजाता ही, तो मैंने सोचा क्यूं ना मैं ही सील तोड़ दूं।

तो शिवम बोला: दीदी कुंवारी थी क्या?

मैंने बोला: हां भाई, एक-दम कच्ची कली थी। पर अब नहीं हैं। भाई अगर तू कहे तो एक बार और चोद लूं? यार अभी पेट नहीं भरा।

तो शिवम बोला: वो तो तुम्हारी अमानत है, जितनी बार मन करे उतनी बार चोदो।

तो मैं दीदी को बाथरूम में ले गया, और शाॅवर आन कर दिया। फिर दीदी की पतली कमर को पकड़ कर पीछे से उनकी चूत में अपना लंड घुसा दिया, और करीब बीस मिनट तक चोदा। जब भी मैं दीदी के चूत में झटके मारता तो फटफट फटर फटर चट चट चट चट पट पट पटर पटर की आवाज़ गूंजने लगती और दीदी की उह आह उह आह अईईईइआई उइई आ ओ माई गाड फक मी फक मी की आवाजें निकलती रही।

कामवासना की इन आवाज़ों ने शिवम को हमारी चुदाई देखने पर मजबूर कर दिया, और वो आकर हमारी चुदाई देख रहा था। मैंने उसे इशारे में बोला तू भी आजा, तो वो आकर काजल दीदी की चूचियों के साथ खेलने लगा और तेजी से दबा-दबा कर पीने लगा। फिर मैंने काजल दीदी को कुतिया बना कर चोदना शुरू किया। फिर घोड़ी बना कर चोदा और फिर मैं लेट गया। उसके बाद मैंने काजल दीदी को ऊपर आने को बोला, तो वो आकर मेरे लंड की सवारी करने लगी।

वो मेरे लंड के ऊपर कूदने लगी। उन्हें भी मजा आने लगा था, और कुछ देर में हम दोनों झड़ गए। फिर हम दोनों एक साथ नहाए और फिर दोनों एक साथ ही बिस्तर पर लेट गए। उधर शिवम खाना बनाया और हम दोनों को करीब 12 बजे दोपहर में जगाया। शरीर में अकड़न सी होने लगी थी। काजल दीदी की जबरदस्त चुदाई होने की वजह से वो अच्छे से चल नहीं पा रही थी।

वो अपने पैर फैला कर चल रही थी। हम तीनों खाना खाए, और मैंने शिवम को बोल कर दवा मंगवायी और काजल दीदी को दवा खाने को दी। फिर उनकी चूत में मैंने वैसलीन लगाया तो मैंने देखा उनकी कुंवारी चूत जो कल रात टाईट और कसी हुई थी, आज उसका कचूमड़ बन गया था। चूत में सूजन हो गयी थी, तो मैंने दो तीन दिन तक काजल दीदी का बहुत ख्याल रखा।

फिर हम मंसूरी घूमने गए। वहां मैंने और मेरे दोस्त शिवम ने मिल कर उसकी बहन को चोदा। ये कहानी मेरी अगली कहानी होगी। धन्यवाद।

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