टक्कर से फ़क कर तक-10

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पिछला भाग पढ़े:- टक्कर से फ़क कर तक-9

राजन भी समझ गए कि दीदी चरम पर पहुँच कर झड़ गयी थी। पर दीदी को कुछ ऐसा जोश चढ़ा था कि झड़ने के बावजूद दीदी अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर राजन के धक्कों का माकूल जवाब दे रही थी, और अपनी उत्तेजना दिखा रही थी।

राजन ने दीदी की चूत में थोड़ा हिस्सा बाहर छोड़ कर लगभग अपना पूरा लंड घुसा दिया था। शायद उनका लंड दीदी की बच्चे-दानी को ठोकर मारते हुए वह महसूस कर रहे थे। राजन की चोदने की क्षमता देख कर मैं हैरान थी। राजन ने मुझे करीब 15 मिनट तक बगैर रुके सख्ती से चोदा होगा। उसके बाद दीदी को भी अब करीब पंद्रह से बीस मिनट से वह चोद रहे थे और बिना झड़े, बिना रुके चोदते ही जा रहे थे। दीदी भी राजन के अलग-अलग एंगल से धक्के मारने से बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रही थी।

दीदी की चूत में राजन का लंड अंदर जाते हुए चूत के किनारे पर लंड की पूरी गोलाई में चिकना द्रव्य उभर कर आता था, जो लंड के चूत में से निकलते ही लंड के ऊपर वापस चिपक जाता था। जैसे-जैसे राजन ने चोदने की फुर्ती बढ़ाई, वैसे दीदी का हिलना और दीदी के साथ उनके स्तनों का फ़ैल-फ़ैल कर उछलना कमाल का था।

दीदी भी उछल-उछल कर तगड़ा जवाब दे रही थी। राजन का लंड जिस तरह अंदर बाहर हो रहा था, वह देखते ही बनता था। दीदी की राजन बड़ी तगड़ी रगड़ाई कर रहे थे, और दीदी के चेहरे के भावभंगिमा से ऐसा भी लग रहा था कि राजन की चुदाई से उनकी चूत में भी काफी दर्द हो रहा था। पर फिर भी वह दुखी कम और सुखी ज्यादा लग रही थी।

मैंने राजन की नज़रों से नजर मिलाई। राजन ने मेरी नज़रों से भांप लिया कि मैं राजन से दुबारा चुदवाने के लिए बेबस हो रही थी। राजन भी मुझे चोदने के लिए अधीर हो रहे थे। पहली चुदाई में जब राजन मुझे चोद रहे थे, तब वह मुझे छोड़ना नहीं चाहते थे। मुझे राजन से चुदवाते हुए उसकी सांसे, उसकी खुशबु, उसके बदन के पसीने की महक इतनी ज्यादा मादक लग रही थी, और मैं मन ही मन इस तरह अपनापन महसूस कर रही थी, कि मैं चाह रही थी कि काश मैं राजन से हर रोज चुदवा पाती।

राजन ने मुझे तब तक ऊपर चढ़ कर ही चोदा था। मैं राजन से अलग-अलग पोज़िशन में चुदना चाहती थी। मुझे पहले ही मिलन में राजन के लंड का नशा चढ़ चुका था। पर दीदी राजन से चुदवाने के लिए बेताब हो रही थी, और मैंने भी राजन पर जोर डाला कि वह दीदी को चोदे। राजन ने मेरी बात मान कर दीदी को चोदा।

करीब आधे घंटे तक राजन ने दीदी की इतनी रगड़ाई की, कि दीदी पसीना-पसीना हो गयी। दीदी की चूत की शायद उससे पहले इतनी तगड़ी रगड़ाई नहीं हुई होगी। उसके बाद भी राजन तो चालू ही थे। जब मैंने राजन को इशारा किया कि बस करे। राजन ने बिना झड़े लंड धीरे से निकाल दिया और तब कहीं जाकर दीदी की जान में जान आयी। जिस तरह राजन दीदी की चूत को रगड़ने में लगे थे, मुझे लग रहा था जैसे मेरा नंबर ही नहीं आएगा।

जब राजन ने चुदाई को रोका, तो दीदी ने आंखें खोली, और उठ कर फ़ौरन राजन को अपनी बांहों में लेकर चूमते हुए बोली, “मुझे आज तक किसी ने इतना तगड़ा नहीं चोदा। मैंने कई अच्छे-अच्छे चोदने वालों से चुदवाया है। पर राजन आप चुदाई में निष्णात हो। एक औरत को कैसे ज्यादा से ज्यादा सुख देना यह आप भली-भांति जानते हो।

मैं जानती हूं तुम मुझसे कहीं ज्यादा मेरी सहेली को चोदना चाहते हो। अब मैं बहुत खुश हूं। अब तुम बेशक रोमा को जी भर कर चोदो। मैं हमारे गीले कपड़ों को तुम्हारी इलेक्ट्रिक इस्त्री को गरम कर के प्रेस कर देती हूं ताकि वह सुख जाए”।

दीदी के फारिग होते ही मैं राजन की बांहों में चली गयी। राजन ने मेरे होंठों से होंठ मिलाते हुए कहा, “रोमा डार्लिंग, तुमने तो मुझे दीवाना ही बना दिया है। अब मैं तुम्हें दिन रात याद करता रहूंगा। काश मैं तुमसे शादी कर पाता। पर अफ़सोस तुम भी शादी-शुदा हो और मैं भी। पर हम चोद तो सकते हैं।

मैं जब भी यहां आऊंगा उससे पहले तुम्हें या दीदी को बता दूंगा। तुम दोनों आ जाना। मैं एक बड़े एरिया का सेल्स मैनेजर हूं। पर अब मुझे इस मार्किट पर और ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा। तुम्हारे कारण हमारी सेल इस एरिया में काफी बढ़ जायेगी।”

मैंने राजन की आंखों में आंखें डाल कर कहा, “मेरे साजन अब मुझे घोड़ी बना कर पूरी ताकत से डॉगी पोज़िशन में बेरहम हो कर चोदो। अब हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है। मुझे तुमसे इतना चुदवाना है कि जिससे मुझे यह चुदाई काफी लम्बे अर्से तक याद रहे। जब तक तुम वापस ना आओ तब तक तुम्हारी यह चुदाई मैं भूल ना पाऊं ऐसा चोदो मुझे।”

यह कह कर मैं पलंग पर राजन के सामने घुटनों के बल मेरी गांड राजन के लंड के पास सटा कर घोड़ी बन कर राजन के तगड़े लंड से चुदवाने के लिए तैयार हो गयी।

राजन ने एक तीखी चपेट मेरी गांड के गाल पर मारी। मुझे यकीन है कि मेरी गांड उस तगड़ी चपेट से लाल हो गयी होगी। मैं पूरी उस चपेट के कारण दर्द से तिलमिला उठी थी। मेरी सिसकारी निकल गयी। पर मेरी गांड पर पड़ी उस चपेट के दर्द से कहीं ज्यादा मचलन उस चपेट के कारण मेरी चूत में हो रही थी। यह किसी की समझ में नहीं आएगा कि एक स्त्री को चुदाई के दरम्यान होते हुए दर्द में इतना मजा क्यों आता है।

मेरी गांड की लालिमा को देख कर राजन का लंड भी और सख्त हो गया। पहले मुझे करीब पंद्रह से बीस मिनट चोदने के बाद राजन ने दीदी को करीब आधे घंटे तक चोदा था। पर उसका लंड उसके बाद भी तना हुआ इतनी सख्ती से खड़ा देख मैं हैरान रह गयी। राजन ने फिर से अपने लंड और मेरी चूत में अपनी उंगली से अच्छे से वह चिकनाहट वाला आयल लगाया।

अपना लंड मेरी चूत की पंखुड़ियों को अलग कर राजन ने पहले लंड का टोपा और बाद में कुछ टेढ़ा-मेढ़ा करके अपना लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। इस बार मुझे राजन के लंड के घुसने से ख़ास दर्द नहीं हुआ। राजन के लंड की मोटाई को मेरी चूत की सुरंगों में मेरी गांड से घिस कर घुसने के कारण मेरा पूरा बदन रोमांचित हो उठा।

जब किसी औरत की चुदाई डॉगी पोज़िशन में होती है तो अक्सर औरत को दोगुनी उत्तेजना का अनुभव होता है। एक तो चूत चुदवाने का अनुभव तो होता ही है। पर उतना ही उत्तेजना का अनुभव होता है गांड में से हो कर लंड जब चूत में घुसता है तो गांड मरवाने का भी एहसास होता है। यह एहसास सिर्फ सामान्य मर्द ऊपर औरत नीचे वाली पोज़िशन से कहीं ज्यादा रोमांचित होता है। ऐसी चुदाई में चूत मचल उठती है और काफी पानी छोड़ने लगती है। स्त्री ज्यादा बार झड़ जाती है।

दूसरी औरतों का तो मुझे ज्यादा पता नहीं, पर मैं डॉगी पोज़िशन में चुदवाने पर बार बार झड़ जाती हूं। जब राजन के जैसे लंड से डॉगी पोज़िशन में चुदवाया, तो फिर तो मेरा क्या हाल हुआ होगा। यह आप सब अच्छी तरह से समझ सकते हो। राजन भी मेरी लाल गांड से हो कर अपना लंड मेरी चूत में डालने के कारण काफी उत्तेजित हो कर मुझे तगड़े से चोद रहे थे।

मैं उनकी चुदाई से पूरी हिल जाती थी। यहां तक कि पूरा पलंग भी राजन की चुदाई के कारण हिल रहा था। मुझे राजन से अच्छे से चुदना था सो मैं भी राजन को मेरी सिसकारियों से और “आह… ओह… जोर से…” कह कर राजन का जोश और बढ़ा रही थी।

मुझे महसूस हुआ कि राजन दो औरतों को इतना ज्यादा तगड़े से चोदने के बाद ख़ास कर मेरी गांड देख कर अपने आप को झड़ने से रोकने में नाकाम साबित होने लगे थे। राजन का बदन सख्त होने लगा था। उनके हाथों की पकड़ मेरे स्तनों पर, मेरी गांड के गालों पर और मेरी कमर पर सख्त होने लगी थी। मुझे बिल्कुल साफ़-साफ़ लगा कि राजन अपना वीर्य छोड़ने के कगार पर थे।

मैं कोई कच्ची उम्र की लड़की की तरह राजन को प्यार करने लगी थी। राजन ने मेरे पूरे बदन को और मेरे पूरे मन और दिमाग को उस चुदाई से हिला डाला था। डॉगी पोज़िशन में चुदवाते हुए मैं भी अपने आपको रोक नहीं पा रही थी। अपने आप को काफी देर तक रोकने के बाद अचानक मैं एक सांस में ही झड़ने लगी।

ठीक उसी समय मेरी चूत की सुरंग में एक-दम बड़े जोश के साथ गरमागरम लावे का फव्वारा जैसे राजन के लंड में से फूट पड़ा। मेरी चूत एक-दम गर्म हो उठी। राजन अपने वीर्य को रोक नहीं पाए, और बिना कोई रोकथाम उनके वीर्य का फव्वारा या कहिये की एक सैलाब सा मेरी चूत के कोने-कोने में फ़ैल गया।

राजन के अंडकोष में पता नहीं कितना वीर्य होगा कि मेरी चूत में राजन का लंड सख्ती से जैसे जम गया था। फिर भी मेरी चूत में से राजन का वीर्य बह कर उभर कर बाहर निकलने लगा। राजन के कमरे के पलंग की सफ़ेद चद्दर राजन के वीर्य और थोड़ी मात्रा में मेरी चूत से निकला पानी मिल कर गीली हो रही थी। राजन ने काफी देर तक उनका लंड मेरी चूत में रहने दिया।

मैं भी राजन की ठुकाई से थकी हुई पलंग पर राजन का लंड मेरी चूत में ही रखे हुए लुढ़क पड़ी। राजन मेरे ऊपर लेट गए। उनका आधा लंड मेरी चूत में से बाहर निकल पड़ा। उनका बाकी आधा लंड फिर भी मेरी चूत में गड़ा हुआ था।

इस तरह हम दोनों काफी देर तक पलंग पर पड़े रहे। दीदी ने तब तक हमारे कपड़ों को गरम इस्त्री फिरा कर सुखा दिया था। कुछ देर बाद मैं पलट गयी। राजन मेरे ऊपर ही लेटे रहे। उनका महाकाय लंड तब काफी हद तक ढीला पड़ चुका था, और फिसल कर मेरी चूत में से बाहर निकल पड़ा।

मैंने राजन के सर को मेरे दोनों हाथों में पकड़ कर उनकी आंखों में मेरी आंखें डाल कर कहा, “मुझे यकीन है कि तुमने मुझसे पहले बहुत सारी स्त्रियों को चोदा होगा। पर मुझे यह भी यकीन है कि तुमने इससे पहले रोमा जैसी किसी स्त्री को इस तरह इतने प्यार से नहीं चोदा होगा। किसी स्त्री ने भी आज तक आपसे इतनी गर्म-जोशी से नहीं चुदवाया होगा।”

राजन ने मुझे चूमते हुए मेरी बात का जवाब देते हुए कहा, “आज तक मैंने इतनी गर्म चूत को कभी नहीं चोदा। तुम यकीन रखो कि मैं जल्दी ही वापस आऊंगा, और इस शहर की दो सबसे ज्यादा चुदक्क्ड़ औरतों को दुबारा चोदूंगा।”

काफी देर तक मुझे चूमते रहने के बाद राजन ने दीदी को भी एक तगड़ा सा चुंबन किया। इस वाकये के बाद राजन जब भी हमारे शहर में दौरे पर आते हम कुछ ना कुछ बहाना कर उसी रिसोर्ट में उनसे चुदवाने जाते रहते थे। इस बात को अब एक साल हो गया। राजन का तबादला किसी और जगह हो गया और हमारी यह “टक्कर से फ़क कर” की कहानी समाप्त हो गयी।

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