अम्मी जान और तीन बहनों को प्रेग्नेंट कर दिया 1

Maa Beta

Incest Muslim

दोस्तो मैं एक मुस्लिम लड़का हु और मेरे घर में मैं अम्मी जान और और मेरी तीन बहन साथ रहते हैं मेरे से दो बहन बडी थी और एक छोटी थी मेरे अब्बू दुबई में जॉब करते हैं तो ओ दो साल में एक महीने के लिए घर आते हैं. Incest Muslim

दोस्तो कुछ चीजें कई बार बहुत अच्छी लगती है, जैसे आपको एक एक भी लड़की चोदने को ना मिली हो और ना ही लाइसेंस मिला हो यानी कि शादी हुआ हो और एका एक 6 महीने में चार चार माल चोदने को मिल जाए ओ भी फ्री में तो कितना मजा आएगा।

दोस्तो मेरे साथ ऐसा ही हुआ मेरे अब्बू को दुबई गए हुए अभी तीन महीने ही हुआ था की अम्मी जान को मैंने चोद चोद कर प्रेग्नेंट कर दिया। अब मुझे समझ नहीं आ रहा है कि हालात को कैसे संभालूँ, ऊपर से अम्मी जान कहती हैं की बच्चा नहीं गिराऊंगी जब मै कहता था कि एबॉर्शन करा लो तभी अम्मी जान कहती थी कि हमारे धर्म में बच्चा गिराना गुनाह है और देखना मेरा बच्चा लाखों में एक होगा।

साली अम्मी जान को लगता है कि ओ बच्चा पैदा कर लेगी और किसी को पता भी नही चलेगा लेकिन मै बहुत डर गया था कि समाज क्या कहेगा और ऊपर से तीन बहन घर में थी यह सब कैसे कैसे हुआ था यह सारी बातें आपको इस कहानी के माध्यम से क्रेजी सेक्स स्टोरी पर लिख रहा हूं यह कहानी मेरी सच्ची कहानी है और ज्यादा पुरानी भी नहीं है एकदम नई है।

आज आपको यह सेक्स कहानी पढ़ कर बहुत हैरानी होगी। दुनिया कहां से कहां निकल गया है आजकल रिश्ते नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। सभी लोग वासना के भूखे हैं जिसको जो पसंद आ जाए उसके साथ ही सो जाता है। दुनिया बदल चुकी है इस वजह से काफी कुछ गड़बड़ हो गया है। सिलसिलेवार तरीके से आपको मैं अपनी सेक्स कहानी आपको बता रहा हूं।

मैं अम्मी जान और तीन बहनों के साथ बहुत खुश खुश होकर रहते थे। मेरी बहनों को और अम्मी जान को भी बहुत अच्छा लगा मेरे व्यवहार को देखकर क्योंकि मैं उन लोगों को बहुत प्यार करता हूं इस वजह से अब्बू के दुबई जाने के बाद भी हम लोग एक दूसरे से घुलमिल कर रहते और अब्बू की कोई कमी नही खलती.

ऊपर से अब्बू महिने का साठ हजार रूपए भेज दिया करते थे लेकिन फिर भी मेरी बडी बहन एक प्राइवेट स्कूल में जॉब करने लगी और मेरी दुसरी बहन सिलाई सीखने जाने लगी। और छोटी बहन स्कूल चाली जाती जिसमे बडी बहन पढ़ाती थी उसी में छोटी बहन का एडमिशन करा दी.

अब घर में मै और अम्मी जान रहती थी मेरा काम घर पर नहीं था मुझे कही नहीं जाना होता था उस समय घर में मैं और मेरी अम्मी जान दोनों ही रहते थे। अम्मी जान बहुत हॉट और जवान लगती थी उनको देख के कोई थी ये नही कहेगा कि वो चार बच्चो की मां होगी.

बदन गोरी चिट्टी और बहुत खूबसूरत थी बड़ी-बड़ी चूचियां गोल गोल गांड देखकर किसी का भी मन डोल जाय क़रीब एक सप्ताह बाद ऐसा ही हुआ मेरे साथ मैं काफी खुले दिल का इंसान हूं कोई भी बात कहने में ज्यादा ना झिझक होती है ना शर्म आती है मुझे।

इस वजह से ही अम्मी जान मेरे ज्यादा करीब आ गई क्योंकि मैं हमेशा मजाक मजाक में कह देता था। की अब्बू होते तो कितना माजा आता इस पर अम्मी जान मुस्कुरा कर अपना हाथ मेरे गाल पर लगा देती, एक दिन अम्मी जान मुझे बोली कि बेटा जा बाजार से कुछ सामान ला दे और अम्मी जान एक पर्ची दे दी.

मैं जैसे ही पर्ची अम्मी जान के हाथों से लिया अम्मी जान एक प्यारी मुस्कान के साथ मुझे पर्ची दे दी जैसे कि कोई गर्लफ्रेंड अपनी ब्वॉयफ्रेंड के साथ बात करता है मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं सोचने लगा कि क्या अम्मी जान सच में मेरे से ओ वाला प्यार करेगी.

फिर मैं होस में आया और सोचने लगा कि मैं भी क्या क्या सोच रहा हूं वो मेरी सगी अम्मी जान है और वैसे ही खुले दिल की महिला है तभी मैं बाजार पहुंचा और पर्ची देख कर सामान लेने लगा पर्ची में सब्जी और मसाला यही सब लिखा था मैं सब्जी ले के जैसे ही झोला में रखाने वाला था तभी उसमे एक छोटा डाबा दिखा सायद दवा का था.

मै वो डाबा निकाल कर जेब में रख लिया उसमे लंबा वाला बैगन भी था सब सामान लेने के बाद जब घर की ओर लोटा तभी रास्ते में ओ डाबा का याद आया जब खोल के देखा तो देखता रह गया उसमें कंडोम था मै फिर से जेब में रख लिया और सोचने लगा कि अम्मी जान कंडोम को क्या करती है.

यह सोचते सोचते घर पहुंच गया और अम्मी जान को थैला दे दीया कुछ देर बाद अम्मी जान मेरे पास आई और बोली बेटा थैला में एक डाबा था देखा क्या मैं अम्मी जान को देखते हुए बोला नही उसमे तो कुछ भी नहीं था अम्मी जान थोड़ी उदास होते हुए अरे बेटा मैं कल दवा लाई थी वो मील नही रहा पता नहीं कहा रख दी.

मैं मामी जान को बोला कोई बात नहीं मैं अभी ला देता हूं पर्ची दीजिए तभी अम्मी जान घबराते हुए बोली नही बेटा मैं खुद ले आती हु तुम परेशान मत हो और अम्मी जान पीछे मुड़ के जाने लगी क्या गांड थी अम्मी जान ऐसा लग रहा था जैसे दो पहाड़ आपस मे मिल के बना हो अभी थोड़ी ही दूर गई.

तभी मैं अम्मी जान को बोला की ये लो अपनी दबा अम्मी जान तुरन्त घूमी और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई तभी मैं डाबा निकाल के खोल दिया और एक कॉन्डम को खोल के बोला अम्मी जान ये कोन सा दवा है अब अम्मी जान घबरा गई और रोने के कगार पर पहुंच गई.

तभी मैंने अम्मी जान की इमोशंस का फायदा उठाया। और गले लगा लिया यहीं से शुरूआत हो गई। गले लगाने के साथ-साथ अम्मी जान की गाल पर मैंने एक चुम्मा दे दिया अम्मी जान शर्मा गई और मुझे और भी ज्यादा जोर से टाइट से पकड़ ली।

मेरा हाथ अम्मी जान की पीठ पर घुमाने लगा धीरे-धीरे करके अम्मी जान की पहाड़ जैसी चूतड़ को मैं पकड़ लिया। जैसे ही मैंने गांड पे हाथ फेरा वो सीधे घूम गई अब अम्मी जान की गांड मेरे लंड के पास आ गया। दोनों हाथों को आगे करके मैंने अम्मी जान की दोनों चूचियों को पकड़ लिया।

चुचियां पकड़ते हैं वह और भी ज्यादा शर्म आने लगी अम्मी जान बोली छोड़ दो बेटा यह क्या कर रहे हो। मैंने कहा अम्मी जान अभी तो आपने बोला की आपकी दवा का डाबा नही मील रहा वही तो दे रहा हु अम्मी जान बोली नही मुझे कोई दवा नही चाहिए छोरो मुझे.

मैं भी अम्मी जान की दोनों चुंचियो को दबाते हुए बोला अम्मी जान मरीज को बीना दवा दीए छोड़ा नहीं जाता है अब अम्मी जान ना के बराबर विरोध कर रही थी लेकिन फिर भी बोली नही बेटा कोई देख लेगा छोर दो मैने अम्मी जान को बोला यहां हम दोनों के अलावा कोई नहीं है और कोई आने वाला भी नहीं है मैं मैन गेट बंद करके आया हु आप मुझे रोको मत.

यह सब बोलते बोलते मैंने अम्मी जान को पीछे से गोद में उठा लिया और बेड रूम में जानें लगा अब अम्मी जान की गांड बिलकुल मेरे लंड पर रगड़ खा रहा था और जैसे ही बेड के पास पहुंचे धीरे से अम्मी जान को बेड पर लिटा दिया। और उनके ऊपर चढ़ गया उनके होंठ को चूसने लगा उनके ब्लाउज को खोल दिया.

उनके बड़े-बड़े चुचियों को उनके ब्रा से आजाद कर दिया और चूसने लगा अब अम्मी जान शांत हो गई और मजा लेने लगी. मैं धीरे-धीरे खिसक कर नीचे जानें लगा अम्मी जान की चिकनी पेट पर हाथ रख दिया और धीरे धीरे नाभी में ऊंगली करने लगा अम्मी जान बिल्कुल शान्त हो गई ना कोई विरोध और ना ही कोई उछल कुद.

मैं एक हाथ नाभी में रख के सहलाते सहलाते दुसरे हाथ से अम्मी जान को नीचे से नंगा कर दिया सायेद अम्मी जान को पाता भी नहीं चला या जान बुझ के शान्त थी तभी अपना मुंह अम्मी जान की चूत पर रख दिया और धीरे धीरे चाटने लगा अम्मी जान मोन करने लगी.

अब मैं समझ गया कि अम्मी जान अब कही नही जानें वाली है और अम्मी जान की चूत की पंखुड़ियां फरफरा रही थी धीरे से पंखुड़ियां मुंह में डाल के चूसने लगा और दोनो हाथों से अम्मी जान की केला की पेड़ जैसी जांघों को सहलाने लगा अम्मी जान अपनी दोनो हाथो से बेड शीट पकड़ ली और धीरे धीरे चलाने मॉन करने लगी.

मैं लगातार अम्मी जान की चूत की पंखुड़ियां चूसे जा रहा था और जांघो को सहला रहा था क़रीब बीस मिनट बाद अम्मी जान मेरे सर को पकड़ के अपनी चूत पर दबाने लगी और बोली बेटा आह ओह ओह आई हे आल्ला मै आई और एक ज़ोर दार आवाज के साथ मेरे मूंह में झरने लगी.

मैं एक एक करके पाच घुट मारा और अम्मी जान की मलाई गटग गया और दोनो पंखुड़ियां फैला के चूत को चाटने लगा अम्मी जान मेरे माथे पर हाथ फेरने लगी पूरा चूत चाट चाट के साफ करने के बाद जब चेहरा अम्मी जान से मिली अम्मी जान शर्मा गई और अपनी आंखे बंद कर ली. “Incest Muslim”

तभी मैं अपना मोटा लंड निकाला और अम्मी जान की चूत के छेद पर रखा जबतक अम्मी जान कुछ समझ पाती उससे पहले एक जोर दार धका मारा और पूरा अन्दर घुसा दिया। अम्मी जान चार बच्चो को जन्म दी थी जिसके कारण इनकी चूत थोड़ी फैल गई थी मेरा इतना मोटा लंड भी आसानी से ढुक और निकल रहा था.

मै लंड को पूरा बाहर निकाल के एक बार में ही अंदर घुसा देता अम्मी जान भी अपनी दोनो टांगे फैला दी और चुदवाने लगी करीब पांच मिनट बाद अम्मी जान झड़ गई लेकिन मै चोदता रहा और दस मिनट बाद हम दोनों एक साथ झर गए झरते समय मैं पूरा अन्दर घुसा दिया और अम्मी जान के ऊपर लेट गया.

धीरे धीरे मेरा लंड ढीला हो गया और चूत से बाहर निकल गया अब हम दोनों एक दूसरे के करीब आ चुके थे अम्मी और बेटा का रिश्ता चुदाई के बाद पति पत्नी में बदल गया था। हम दोनों के बीच में सारे बंधन टूट चुके थे एक दूसरे के जिस्म के करीब आ गए थे एक दूसरे के जिस्म के साथ खेल रहे थे।

अम्मी जान को जवान लंड अपनी चूत में लेकर मजे करने लगी दुसरे दिन जब अम्मी जान को चोदने लगा तब अम्मी जान अपनी गांड गोल गोल घुमा घुमा कर मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर ले रही थी। देख के लगता ही नहीं था आज दुसरे दिन चुदवा रही हो ऐसा लगता था कि कई बरसों से चुदवा रही हो. “Incest Muslim”

करीब बीस मिनट बाद अम्मी जान झर गई और मेरे मुंह पर मुंह रख दी और हाफने लगी मेरा लंड अभी भी अम्मी जान की चूत में घुसा हुआ था और पूरा टाइट था थोड़ी देर बाद अम्मी जान पलटी और अब मै अम्मी जान के ऊपर आ गया अब मैं धीरे धीरे कमर हिलाने लगा. “Incest Muslim”

अम्मी जान अभी भी मेरा होठ चूसने में लगी हुई थी धीरे धीरे मैं स्पीड पकड़ लिया और फिर से कल जैसा एक बार में बाहर और एक बार में अन्दर घुसाने लगा अम्मी जान अपनी दोनो टांगे फैला दी और चुदाई के मजे उठाने लगी मै चोदते चोदते अम्मी जान से पूछा कि आप कॉन्डम का क्या करती हैं.

अम्मी जान बोली बेटा तू इतना मोटा लंड जो पूरा अन्दर घुसा चोदे जा रहा ओ कॉन्डम का ही देन है मैं हैरानी से पूछा अम्मी जान इसमें कॉन्डम का क्या मतलब तभी अम्मी जान मुस्कुराते हुए बोली बेटा इसी कॉन्डम को लम्बी लम्बी बैगन पे चढ़ा के रोज चुदती हूं तभी तो आज तुम इसका फायदा उठा रहे हों नही तो इतना मोटा लंड इतनी आसानी से ले पाती. “Incest Muslim”

तभी मुझे लगा मैं झड़ने वाला हूं चार पांच झटका जोर जोर से लगाया और अपना सारा माल अम्मी जान की चूत में ही डाल दिया। अब रोजाना का ऐसा हो गया कि मेरी बड़ी बहन और छोटी स्कूल चले जाते जाते थे और मेरे दूसरी बहन सिलाई सीखने।

वह जो 3 घंटे का समय होता था दो बहन तो 6घण्टे बाद आती थी लेकीन दुसरी बहन सिर्फ 3घण्टे सिलाई सीखती थी अब अम्मी जान को रोजाना पुरा नंगा करके चोदता था। इतना चोदने के बाद भी जब अम्मी जान को पिछे से देखता तभी मेरा लंड खड़ा हो जाता क्या गांड थी अम्मी जान की कसम से पहाड़ की तरह और चूत की पंखुड़ियां तो मानो जनत की पड़ी थी.

मैं अब रोज दिन में चोदने लगा अम्मी जान भी चुदाई की मलाई चटवाने लगी सबसे ज्यादा मजा अम्मी जान की चूत की पंखुड़ियां चूसने में मिलता था अम्मी जान भी चुदकर थी कभी कभी तो तीन घण्टे में तीन बार चोद देते थे दो बार तो रोज चोद ही देते.

लेकिन मै अम्मी जान की चूत की पंखुड़ियां चूसते चूसते जब उनकी गांड की छेद देखता कास अम्मी जान एक बार अपनी गांड मारवाले तो मैं जन्नत चला जाऊंगा एक दिन चूत चूसते चूसते अम्मी जान की गांड पर जिभ सटाया वैसे ही अम्मी जान हड़बड़ा कर उठ गई और बोली बेटा उसमे नहीं.

मैं अम्मी जान को सहलाते हुए बोला एक बार सिर्फ एक बार अम्मी जान बोली बेटा तू समझा कर आज तक मैं ऊंगली तक नही डाली हु तभी मैं बोला अम्मी जान अगर मेरे जगह आज अब्बू होते तो उनको आप मना करती अम्मी जान बोली बेटा तेरा अब्बू हजारों बार बोले होंगे लेकीन एक बार भी उसमे करने नही दी वो भी लास्ट में मान गए तू जब चाहें मेरी चूत पेल दिया कर बाकी पिछे कभी सोचना मत. “Incest Muslim”

मैं भी जबरदस्ती नहीं किया और रोज तीनो बहनों के जाते ही गेट अन्दर से बंद करके अम्मी जान को तीन बार चोद देता करीब दो-तीन महीने बाद ही मेरी अम्मी जान प्रेगनेंट हो गई। जब अम्मी जान ने मुझे बताया कि बेटा मुझे इस महिने आया नही तब मै समझा नही और बोला अम्मी जान अब्बू का पेमेंट मिला नही होगा इसीलिए नही आया एक दो दिन में भेज देंगे.

मैं समझा अम्मी जान पेमेंट की बात कर रही है जो कि अब्बू दुबई में हर महिने भेजते थे तभी अम्मी जान मेरी बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोली अरे मेरे बुद्धू बेटा मई पेमेंट की बात नहीं कर रही हु तुम बाप बनने वाले वो मेरी एमसी नही आई ये दूसरा महीना चल रहा है. “Incest Muslim”

इतना सुनते ही मेरा होस उर गया मैं अम्मी जान को कितना समझाया कि अबोशन करा लो लेकिन अम्मी जान कहती हैं कि नाही यह बेटा दुनिया का सबसे अच्छा बेटा होगी मै इसे जन्म दुंगी दोस्तो अभी भी अम्मी जान चुदवाने से इनकार नहीं करती हैं अभी भी रोज एक बार चुदवा लेती हैं लेकिन अबोसन के लिए नही मान रही.

आज गुसे से अम्मी जान को चोदा नही और जब दुसरी बहन सिलाई सिख के जब घर आई उसी समय अम्मी जान डाक्टर के पास चाली गई जच्चा बच्चा कैसा है डाक्टर एक सप्ताह अम्मी जान को रोज बुलाया कभी ये जांच कभी वो जांच और इस बीच दोपहर में दुसरी बहन और मैं घर में रहते थे और धीरे-धीरे उसके साथ भी मेरा रिश्ता बन गया था। “Incest Muslim”

दीदी जान की चूत बहुत टाइट थी छोटी छोटी चूचियां छोटी छोटी गोल गोल गांड। खूबसूरत और सेक्सी लड़की मेरी दीदी जान पर मेरा दिल आ गया अम्मी जान को हॉस्पिटल जाते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा रोज चोदने की आदत हो गया था और आज बीना चोदे कैसे रहें सोच ही रहा था कि दीदी जान चाय लेके कमरे में आई और बोली भाई जान ये लो चाय पी लो और अम्मी जान कहा गई.

मै चाय लेते हुए बोला नही मुझे नही बताई सयेद बाजार गई होंगी दीदी जान ठीक है बोलके जानें लगी दोस्तो क्या गांड मटका के चल रही थी एसा लगा कि अभि साली को पटक के चोद लेता तभी अचानक दीदी जान पीछे मुड़ी और बोली भाई पानी पियोगे मैं हा में सर हिलाया और सोचने लगा कास दीदी जान चोदने देती कितनी टाइट चूत होगी हे अल्ला इसे पटा दे.

तभी दीदी जान पानी लेके आई और पानी देते हुए उनकी नजर मेरे पायजामे पर पड़ी थोड़ी देर एक टक मेरे पायजामें पर देखी और मुस्कुराते हुए पलट कर जानें लगी मै फिर से दीदी जान की मटकती गांड देखता रहा और दीदी जान के जानें के बाद जब मेरा नजर नीचे पारा मैं शर्म से लाल हो गया. “Incest Muslim”

दोस्तो मेरा लंड मेरे पायजामे से बाहर था और बूंदे बूंदे रस टपका रहा था मै चाय खत्म कर के दीदी जान के रूम में जानें लगा और जैसे ही गेट खोला दीदी जान नीचे झुकी हुई अपनी आखरी कपड़ा चढ़ी निकाल रही थी जैसे ही चढ़ी निकाल कर ऊपर देखी जोर से चिलाईं और और सामने एक बुर्खा थी वो उठा के आगे से अपने आप को ढक लि और बोली भाई जान अब कया चाहिए.

मैं धीरे धीरे दीदी जान के पास पहुंचा और बुर्खे को हटाते हुए बोला दीदी जान मुझे जो चाहिए वो आप दोगी जो पूछ रही हो अब दीदी जान समझ गई कि अब मै नाही मानुगा तभी वो बोली भाई जान तुम्हें जो चाहिए सब दूंगी लेकिन मांगो तो मैं जन्नत जाना चाहता हूं इतना बोला और दीदी जान को बेड पर लेटा दिया.

 और एक बार में ही दीदी जान की दोनों पैर फैलाते हुए उनकी चूत पर जीभ लगा दीया और चूत चाटने लगा क्या मजा आ रहा था अम्मी जान दो गुना अधिक माजा दीदी जान की चूत चाटने में आ रहा था क्योंकि वह नमकीन पानी ज्यादा छोड़ रही थी और उनके छोटे-छोटे चूचियां जब मेरे मुट्ठी में आता तो दीदी जान की आह निकल जाती है। “Incest Muslim”

दीदी जान के निप्पल पिंक कलर का है मैंने चूस चूस के उसको लाल कर दीया और जब चूत फैला कर छेद देखा तो देखता ही रहा दोस्तो जहा अम्मी जान की चूत में मेरा पूरा जीभ अन्दर घुसा देता था वही दीदी जान की चूत में ना पंखुड़ियां थी और ना ही मोटा सुराख चूत कि नीचे लास्ट में एक पतली छेद थी और थोड़ी ही नीचे एक काला गोला था.

वो दीदी जान की गांड थी अम्मी जान की गांड में आरम से एक उंगली डाल सकता लेकिन दीदी जान की गांड और चूत दोनो बहुत टाइट थी फिर भी दीदी जान चूत चाट चाट कर झार दीया और सारा मलाई चाट गया दोस्तो अब कहानी के अगले भाग में पढ़ना की कैसे दीदी जान को भी अपने लंड का चस्का लगा दिया.

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