अगर मुझसे मोहब्बत है-21

Hindi Chudai Kahani

जो करता है मुझे उल्फत और बन्दा है भरोसे का।

पति भी मिन्नतें करता है चुदवाऊं उसी से मैं।

तो फिर शर्मो हया को छोड़ क्यों ना मान जाऊं मैं।

क्यों ना अपने पति से मिल के चुदवाऊं उसी से मैं?

सूरज ने रीता को देख कर कहा, “देखो वैसे तो आप दोनों अब हमें जान-पहचान गए हो। पर यह जानना जरुरी है कि मेरी और किरण की बाकी समाज से बिल्कुल अलग सी विचारधारा से आपके विचार मेल खाते हैं या नहीं। हमने यहां एक छोटा सा ग्रुप बनाया है जिसमें पांच दम्पति हैं, जो हमारी विचारधारा और हमारे सामाजिक और आर्थिक स्तर से मेल खाते हैं। हम सब ने मिल कर आप दोनों को हमारे ग्रुप में शामिल करने के लिए आमंत्रित किया है।

अगर आप दोनों को सही लगा हो तो आप मेरी बातें सुनने के बाद शामिल हो सकते हो। अगर आप को हमारी बात सही ना लगे और आप मना करोगे, तो भी यह स्वीकार्य होगा और यह बात यहीं समाप्त हो जायेगी और सिर्फ हमारे बीच ही रहेगी।“

यह कह कर सूरज ने अपने लैपटॉप से सामने के परदे पर पावर पॉइंट प्रोग्राम से एक प्रेजेंटेशन देना शुरू किया।

उस प्रेजेंटेशन का शीर्षक था “FUCKING”। इस नाम को पढ़ते ही रीता कुछ चौंक गयी। मैंने मेरी पत्नी का हाथ थाम कर उसे शांत किया। सूरज ने इसके बारे में बोलते हुए हमें कहा, “हम ने हमारा अपना एक छोटा सा ग्रुप बनाया है। हमारे इस छोटे से ग्रुप का नाम है “FUCKING” माने “चुदाई”। इस नाम को सुन कर चौंकिए मत। इसका मतलब है हमारा जो ग्रुप है वह मित्रता, समझदारी, संवेदनशीलता, दया, अत्यंत गुप्त रूप से घनिष्ठ मित्रता का प्रयोग करने वाला, शादी-शुदा दम्पतियों से बना ग्रुप है।

चूँकि यह ग्रुप शादी-शुदा दम्पतियों के लिए है, और इसमें चुदाई की प्राथमिकता को स्वीकार करता है, और शादी के अनुबंध को एक नया रूप देने का प्रयास करता है, इसी लिए इसका नाम “FUCKING” दिया गया है। इस वक्त इस ग्रुप में मुझे और किरण को मिला कर सिर्फ पांच दम्पति हैं। अगर आप दोनों शामिल होंगे तो हम छह दम्पति हो जाएंगे।

हमारे इस ग्रुप के सदस्य शादी के रीती रिवाज और बंधन को मानते हुए उसमें कुछ संशोधन के पक्षधर हैं और हमारा नजरिया पूर्व प्रस्थापित प्रणालियों से थोड़ा सा हट कर बाकी नियमावली का पालन करना है। हम शादी के बंधन को एक सीमित परिभाषा में जैसे सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक और संतति सम्बन्धी परिपेक्ष में प्रणाली गत व्यवस्था के पक्षधर हैं।

हमारी प्रणालीगत व्यवस्था से मात्र एक ही आपत्ति है और वह है सेक्स यानी चुदाई के मामले में। हम मानते हैं कि चुदाई में शादी की मर्यादाओं को ढील देनी चाहिए। मतलब यदि पति या पत्नी अपने मन पसंद किसी गैर आदमी या औरत को चोदना अथवा उन से चुदवाना चाहें तो बगैर परम्परागत शादी के बंधन को आहत किये हुए उन्हें यह छूट होनी चाहिए।”

रीता ने उठ कर पूछा, “यदि हमने ऐसे किया तो क्या पति और पत्नी के बीच के विश्वास का ढांचा टूट नहीं जाएगा?”

किरण ने मुस्कुराते हुए जवाब देते हुए कहा, “तुम्हारी बात बिल्कुल सही है। हमारे समाज ने शादी नामक एक सामान्य सामाजिक ढांचा स्त्री और पुरुष की काम वासना माने चुदाई की पूर्ति के लिए स्थापित किया। उसे बनाये रखने के लिए कुछ मर्यादाएं भी तय की। सदियों के परीक्षण में वह खरा भी उतरा है।

इसका उद्देश्य यह था कि स्त्री और पुरुष अपनी कामवासना की पूर्ति के लिए दोनों सामान्यतः एक ही जोड़ीदार के साथ बंधे रहें ताकि इर्षा, अधिकार भाव, संपत्ति लालसा, संतान मोह इत्यादि मामले में एक दूसरे के बिच संघर्ष ना हो। इस व्यवस्था को हम कहते हैं “Exclusive Only” माने एक ही।

परन्तु इस “बाहरी नहीं” सम्बन्ध में स्त्री और पुरुष की कामवासना में जोड़ीदार बदलने पर पाबंदी थी। इसका कारण था परम्परागत पुरुषों का स्त्रियों के ऊपर आधिपत्य का भाव। इसके अलावा स्त्रियों का भी दूसरी स्त्री के प्रति इर्षा और अपनी सामाजिक और आर्थिक असुरक्षा के भाव से ग्रसित होना। पर इस पाबंदी के कारण स्त्री और पुरुष की वासनापूर्ति में विविधता और प्रयोगशीलता (मतलब दूसरे स्त्री या पुरुष से चुदाई करना) का अभाव था जो हर मनुष्य कुछ समय के सहवास के बाद चाहता है।

एक ही पत्नी को सालों साल चोदते या एक ही पति से सालों साल चुदवाते हुए स्त्री या पुरुष दोनों ही ऊब जाते हैं। इसके कारण वैवाहिक जीवन में एक तरह की नीरसता पैदा हो जाती है। हमारा ग्रुप मानता है कि अगर विचारों में हम कुछ उदारता ला पाएं तो विवाहेतर चुदाई से शादी के संबंधों को आहत किये बिना “Inclusive Approach” माने “बाहरी भी नीति अपनाने से इस कमी को पूरा किया जा सकता है।

हम हमारे इस ग्रुप के द्वारा इसी विचार को आगे बढ़ाना चाहते हैं ताकि पति अथवा पत्नी किसी गैर मर्द या औरत को चोदते हुए अपने आप को दोषी महसूस ना करें और चोरी छिपके से ऐसा ना करना पड़े जिसके कारण एक दूसरे पर अविश्वास का वातावरण पैदा हो।”

सूरज ने मेरी और रीता की और देखा। सूरज की नजर को देख और सूरज की बात सुन कर रीता मेरी और देखने लगी। मैंने अपने कंधे हिलाते हुए कहा, “मैं तो पहले से ही ऐसी व्यवस्था का पक्षधर हूँ। मुझे इस में कोई आपत्ति नहीं। मैं तो रीता पर कब से दबाव डाल रहा था कि वह किसी गैर मर्द से चुदवाये।” रीता ने भी सूरज की और देख कर अपना सर हिला कर सूरज को आगे बढ़ने के लिए इंगित किया।

सूरज ने हमारे इशारे से प्रोत्साहित हो कर और जोश से कहना चालू रखा, “हमारे ग्रुप में हम अभी सिर्फ पांच दम्पति हैं। हम दसों इस सिद्धांत में मानते हैं। जब भी हम में से किसी को किसी की पत्नी या किसी के पति से चोदने या चुदवाने का मन होता है तो वह उनसे बात करके अपने पति या पत्नी से बात कर पुरुष उस महिला को चोद सकता है। या महिला उस पुरुष से जरुरी गुप्तता रखते हुए चुदवा सकती है। किसी भी पति या पत्नी को इसमें कोई आपत्ति नहीं होती। हम ऐसे माहौल को कहते हैं “बाहरी भी” माने “Inclusive Also”.

इसमें एक दूसरे की पहचान अत्यंत गुप्त रखना सबसे बड़ी योग्यता है और इसके कारण इसमें सिर्फ इतने ही दम्पति शामिल हैं। हम चाहते हैं कि आप दोनों भी हमारे इस ग्रुप में शामिल हो कर हमारे इस ग्रुप की विविधता बढ़ाएं।”

रीता ने सूरज की और प्रश्नात्मक दृष्टि से देखने पर सूरज ने कहा, “दाखिले के तौर पर मेरी शादी किरण से हुई है तो यह जरुरी नहीं कि मैं सिर्फ किरण को ही चोद सकता हूँ। मुझे यह स्वतन्त्रता है कि मैं किसी और स्त्री को भी चोदूँ तो वह बेईमानी नहीं माननी चाहिए। यही बात किरण पर भी लागू होती है। किरण को भी यह स्वतन्त्रता है कि वह अगर किसी से चुदवाना चाहती है तो वह बिना हमारी शादी को आहत करे चुदवा सकती है।

चुदाई को छोड़ बाकी सारे मामले में जैसे समाज से सम्बन्ध, जायदाद का सवाल हो या संतानों का सवाल हो तो अपने पति या पत्नी से ही वह संबंध हो दूसरे से नहीं। यही हमारे ग्रुप का मूल सिद्धांत है। तुमने जब इस ग्रुप में शामिल होना स्वीकार किया तो इसका मतलब यह है कि तुमने भी इस सिद्धांत को माना है।”

रीता ने मेरी और देखा। उसने कभी अपनी सबसे ज्यादा तरंगी कल्पना में भी नहीं सोचा होगा कि वह कभी ऐसे ग्रुप में शामिल हो सकती है। बल्कि ऐसा कोई ग्रुप हो भी सकता है यह रीता ने सोचा नहीं था। परन्तु मैं जानता था कि रीता को उस दिन कुछ ऐसे अनुभव हुए थे कि उस शाम उसे यह सब सुनने में कोई हिचकिचाहट नहीं महसूस हुई।

मैंने अपनी उंगली उठा कर कहा, “रीता और मुझे इस ग्रुप में शामिल होना मंजूर है। पर मेरा एक सवाल है। क्या हमें इसी सोसाइटी के सदस्यों से ही चुदाई करनी पड़ेगी या फिर किसी बाहरी को भी हम चोद सकते हैं या उनसे चुदवा सकते हैं?”

सूरज ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा, “बाहरी किसी भी व्यक्ति को आप चोद सकते हैं या उनसे चुदवा सकते हैं। उस पर कोई भी पाबंदी नहीं है। बल्कि हम चाहेंगे की हमारे सिद्धांत को मानने वाले, हमारे स्तर के और भी कई दम्पति जो हमारे ग्रुप की गुप्तता रख सकते हों वह ग्रुप को ज्वाइन करें। इस ग्रुप में सिर्फ दम्पति ही ज्वाइन कर सकते हैं। अकेला स्त्री या पुरुष नहीं।

हम मात्र चुदाई पर ही जोर नहीं देते हैं। हमारे ग्रुप के एक पति सदस्य का एक परायी पत्नी सदस्य से मेल और आकर्षण बढ़ाने का एक और प्रोग्राम है और वह है अंत्योदय सेवा। इसमें हम एक पति दूसरे की पत्नी के साथ चुने हुए समाज सेवा के कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं। इस तरह दोनों में मेलजोल बढ़ता है और आकर्षण पैदा होता है, जिससे अगर वह चाहें तो मौक़ा मिलने पर चुदाई भी कर सकते हैं।

इस तरह से हम समाज सेवा भी करते हैं और चुदाई में अलग-अलग साथी दारों को चोद कर या उनसे चुदवा कर विविधता का आनंद भी लेते हैं। इसी लिए हमने इस ग्रुप का नाम सेवा के गुणों के साथ-साथ FUCKING माने चुदाई पर रखा है।“

सूरज के बात पूरी होने पर रीता भाग कर सूरज के पास गयी और कुछ शर्म से मुस्कुराती हुई बोली, “मुझे कुछ कहना है। मैं चाहती हूँ कि अब हम सब आपस में खुल्लमखुल्ला चूत, लंड, चुदाई आदि शब्दों का खुल कर प्रयोग करने में ज़रा भी ना हिचकिचाएं। आप अभी हमें आपके ग्रुप में शामिल कर लो। मैं आज ही आप से बहुत तगड़े तरीके से चुदवाना चाहती हूँ।”

रीता की बात सुन कर पीछे खड़ी किरण आगे आयी और किरण ने रीता को सूरज से दूर हटाते हुए कहा, “तुमने आज के लिए यह शर्त रखी थी कि आज के दिन सिर्फ पति ही अपनी पत्नी को चोदेंगे, दूसरे की पत्नी को नहीं। तो आज की रात तुम मेरे पति से नहीं चुदवा सकती।

आज तुम्हें तुम्हारे पति से ही काम चलाना पड़ेगा।” यह कह कर किरण रीता की और देख कर कटाक्ष पूर्वक हंसती हुई सूरज का हाथ थामे रिसोर्ट के दूसरी तरफ स्थित रॉयल सुइट में अपने कमरे की और आगे बढ़ गयी।

रीता की शकल उस वक्त देखने जैसी थी। वह किरण की हरकत से काफी आहत हुई थी। रीता रोने जैसी हो रही थी। उस दिन तक रीता की एक नजर के लिए सारे मर्द तरसते रहते थे। दुत्कारने का, या भगा देने का काम रीता करती थी। उसी रीता की सूरज से चुदवा ने की बिनती को किरण ने इस तरह बेदर्दी से ठुकरा दिया। यह रीता के लिए कोई आघात से कम न था।

मैंने चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी। अगर उस समय मैं कुछ बोल देता तो शायद रीता रो ही पड़ती। रीता ने कल्पना भी नहीं की थी कि जो किरण उसे अपने पति से चुदवाने के लिए इतना उकसा रही थी,‌‌ वहीं आज रात जब रीता सूरज से चुदवा ने के लिए तैयार हो गयी थी, तब सूरज को रीता से दूर कर देगी।

रीता मेरी और देख कर रुआंसी शकल बना कर बोली, “ठीक है, मैंने यह रूल जरूर बनाया था। पर सूरज ने यह रूल बदला था और यह कहा था कि हम दोनों कपल एक दूसरे के सामने ही अपनी-अपनी बीवियों को खूब और हर तरह से छेड़ेंगे। ठीक है ना?” फिर मेरी और मुड़ कर बोली, “आप ही बताओ, सूरज ने कहा था की नहीं?”

मैंने कहा, “हाँ यह तो सूरज ने ही कहा था कि दोनों कपल एक-दूसरे के देखते हुए ही अपने साथीदार को हर तरह से चोदेंगे।”

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